धनबाद : रेल मंडल से जुड़ी एक सनसनीखेज घटना का खुलासा हुआ है, जिसमें 'प्रसाद' के नाम पर जहर देकर लूटपाट करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. यह मामला गाड़ी संख्या 20975 चंबल एक्सप्रेस से जुड़ा है, जहां एक महिला की जान चली गई और उसके पीछे छुपे सात शातिर अपराधियों को पुलिस ने दबोचा है.
*लड्डू खाने के बाद बिगड़ी हालत*
घटना 11 मार्च 2026 की है. धनबाद से बांदा जा रही 30 वर्षीय शिवानी अपने पति के साथ जनरल कोच में सफर कर रही थी. इसी दौरान साधु के वेश में एक शख्स ने उन्हें 'प्रसाद' के रूप में लड्डू दिया. महिला ने भरोसा करके 'प्रसाद' खा लिया, लेकिन कुछ ही देर में वह बेहोश हो गईं.
*इलाज के दौरान महिला की मौत*
बेहोशी की हालत में ही आरोपी महिला का पर्स, नगदी और चांदी के गहने लेकर फरार हो गया. पति ने किसी तरह उन्हें बांदा में उतारकर अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन चार दिन बाद इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई. इस घटना के बाद जीआरपी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. मामला गोमो से कोडरमा के बीच का होने के कारण जांच कोडरमा स्थानांतरित कर दी गई है.
*जांच का हाइटेक तरीका*
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराध आसूचना शाखा धनबाद ने CCTV फुटेज खंगालना शुरू किया है. धनबाद स्टेशन के फुटेज में एक साधु संदिग्ध गतिविधि करते देखा गया है. जब जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि यह कोई अकेला व्यक्ति नहीं, बल्कि सात लोगों का गिरोह है.
आसनसोल और वर्धमान के CCTV में पांच साधु एक साथ ट्रेन में चढ़ते दिखे गए हैं जबकि दो अन्य अलग स्टेशन से सवार हुए थे. आगे की जांच में पता चला है कि सभी आरोपी पहले लोकल ट्रेन से काली पहाड़ी स्टेशन पहुंचे और वहां से अलग-अलग स्टेशनों के जरिए चंबल एक्सप्रेस में सवार हो गए. डीडीयू स्टेशन पर सभी सातों आरोपी ट्रेन से उतरते दिखे गए और वहां से बनारस कैंट होते हुए लखनऊ की ओर निकल गए.
*टास्क टीम की सटीक रणनीति*
मामले को सुलझाने के लिए IPF/CIB धनबाद के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई. टीम ने लखनऊ, सुल्तानपुर और मुसाफिरखाना तक CCTV और स्थानीय जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया. आखिरकार अमेठी जिले के निहालगढ़ क्षेत्र में सुराग मिला, जहां इस तरह के ढोंगी साधुओं के रहने की जानकारी मिली.
*ऐसे पकड़ा गया गैंग*
मोबाइल लोकेशन के जरिए आरोपियों की मौजूदगी आसनसोल में ट्रेस की गई. टीम ने वहां पहुंचकर काली पहाड़ी इलाके में अस्थायी डेरा डालकर रह रहे आरोपियों की पहचान की. फिर बेहद सूझबूझ और रणनीति के साथ सभी सातों को ट्रेन में पीछा करते हुए 31 मार्च 2026 को कोडरमा में गिरफ्तार कर लिया गया.
*गिरोह का काला सच*
पूछताछ में खुलासा हुआ है कि सभी आरोपी 'मांगता' जाति से हैं और ये लोग कभी साधु तो कभी फकीर बनकर ट्रेन और गांवों में घूमते हैं. भोले-भाले लोगों को झांसा देकर 'प्रसाद' खिलाकर लूटपाट करना इनका पेशा था.
बरामद सामान
पुलिस ने आरोपियों के पास से नशीली दवा (अल्प्राजोलम), ताबीज, जंतर, रुद्राक्ष माला, कमंडल, मोबाइल फोन, नकद राशि समेत कई सामान बरामद किए हैं.
*गिरफ्तार आरोपी*
धूमी, रज्जाक जोगी, राजू, पहाड़ी, कृपाल, सुनील और मूला उर्फ रामचंद्र, सभी अमेठी (उत्तर प्रदेश) के निवासी हैं. यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि ट्रेन में अंजान लोगों से खाना-पीना कितना खतरनाक हो सकता है. धनबाद रेल मंडल की टीम ने जिस तरह तकनीक और सूझबूझ का इस्तेमाल कर इस जटिल मामले का खुलासा किया, वह सराहनीय है. यात्रियों के लिए यह एक बड़ी सीख भी है, सफर के दौरान सतर्क रहे, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है.

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