धनबाद : झरिया कोलियरी क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे लगी और और भू-धसान से प्रभावित था. इस स्थिति से निपटने के लिए वर्ष 2009 में केंद्र सरकार ने झरिया एक्शन प्लॉन की स्वीकृति दी थी. 7,112 करोड़ की लागत वाले इस एक्शन प्लॉन के तहत निर्धारित कार्यों को पूरा करने के लिए 12 का समय सीमा निर्धारित किया गया था. लेकिन प्रभावित क्षेत्र के लोगों की जरूरतों को देखते हुए झरिया एक्शन प्लॉन को संशोधित किया गया. केंद्र सरकार ने जून 2025 में संशोधित एक्शन प्लॉन को स्वीकृत किया.
दिसंबर 2027 तक काबू पाने का लक्ष्य
झरिया कोलियरी क्षेत्र में आगलगी वाले इलाकों पर दिसंबर 2027 तक काबू पाने का लक्ष्य निर्धारित है. फिलहाल आगलगी वाले सिर्फ सात इलाकों पर काबू पाने का काम बाकी रह गया है. आगलगी और भू-धंसान वाले क्षेत्रों से लोगों को पुनर्वास योजना के तहत दूसरी जगह बसाने के लिए 32 हजार 49 मकानों का निर्माण किया गया है. लेकिन सिर्फ 7,334 परिवारों को ही इन मकानों में शिफ्ट कराया जा सका है.
केंद्र सरकार का मानना है कि कोलियरी क्षेत्र में आसानी से पैसा कमाने की सुविधा होने की वजह से लोग पुनर्वास योजना का लाभ लेने से रहे हैं. हालांकि पुनर्वास की जगह पर स्किल डेवलपमेंट, अस्पताल, स्कूल सहित अन्य आधार भू संरचनाएं विकसित की गयी हैं. दिसंबर 2026 तक 3691 परिवारों को शिफ्ट कराने का लक्ष्य है.
झरिया कोलियरी क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे लगी और और भू-धसान से प्रभावित था. इस स्थिति से निपटने के लिए वर्ष 2009 में केंद्र सरकार ने झरिया एक्शन प्लॉन की स्वीकृति दी थी. 7,112 करोड़ की लागत वाले इस एक्शन प्लॉन के तहत निर्धारित कार्यों को पूरा करने के लिए 12 का समय सीमा निर्धारित किया गया था. लेकिन प्रभावित क्षेत्र के लोगों की जरूरतों को देखते हुए झरिया एक्शन प्लॉन को संशोधित किया गया.
केंद्र सरकार ने जून 2025 में संशोधित एक्शन प्लॉन को स्वीकृत किया. 5940 करोड़ रुपये के इस संशोधित प्लान को दिसंबर 2028 तक पूरा करना का लक्ष्य निर्धारित है. संशोधित एक्शन प्लान लागू होने से झरिया एक्शन प्लान कुल लागत 7,112 करोड़ रुपये से बढ़ कर 13,052 करोड़ रुपये हो गया.
झारखंड एक्शन प्लान के पहले चरण में मुख्यतः दो काम निर्धारित किये गये थे. इसमें Fire Site पर काबू पाना और पुनर्वास योजना के तहत प्रभावित क्षेत्र के लोगों को नया मकान बनाकर उसमें शिफ्ट कराना.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1972-73 में झरिया कोलियरी क्षेत्र में आग वाले क्षेत्र 77 थे. जमीन के नीचे कोयले में लगी आग को बुझाने के नये नये तरीकों के इस्तेमाल कर इस पर धीरे-धीरे काबू पाया गया. फिलहाल आल वाले इलाकों की संख्या 77 से घटकर सिर्फ सात रह गयी है. इस तरह Fire Site, 8.9 वर्गी किलोमीटर से घट कर सिर्फ 1.8 वर्ग किलोमीटर रह गया है. इसपर दिसंबर 2027 तक काबू पाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. यानी दिसंबर 2027 के बाद झरिया कोलियरी क्षेत्र में कोई ऐसा इलाका नहीं बचेगा, जहां जमीन के नीचे कोयले में आग लगी हुई हो.
झरिया एक्शन प्लान के तहत आग और भू-धंसान से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को पुनर्वास योजना के तहत मकान बनाकर उसमें शिफ्ट कराना है. इस लक्ष्य के तहत 32 हजार 49 नये मकानों का निर्माण कराया जा चुका है. इन मकानों में अब तक सिर्फ 7,334 परिवारों को ही शिफ्ट कराने में कामयाबी मिली है.
झरिया कोलियरी क्षेत्र में रहने वाले कुल 1130 परिवारों की ओर से उस जमीन पर दावा पेश किया गया था, जहां वह रह रहे हैं. इसकी जांच में पाया गया कि दावेदारों में से सिर्फ 172 परिवार ऐसे पाये गये जिनके पास जमीन के वैध दस्तावेज हैं. शेष 958 दावेदारों के पास जमीन का वैध दस्तावेज नहीं है. जिनके पास वैध दस्तावेज है, उन्हें LTH और जिनके पास दस्तावेज नहीं है, उन्हें NLTH के नाम से जाना जाता है. हालांकि एक्शन प्लान में दोनों ही श्रेणी के लोगों को पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाना है.
पहले इन दोनों ही श्रेणी के लोगों को दी जाने वाली सुविधाओं में अंतर था. लेकिन इसे संशोधित कर दिया गया है. अब दोनों ही श्रेणी के लोगों को समान सुविधाएं दी जा रही है. BCCL बोर्ड के फैसले के तहत अब मकान लीज के समय लाभुकों को स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस नहीं लगेगा. BCCL द्वारा मकान लीज पर JRDA (Jharia Rehabilitation and Development Authority) को लीज पर देगी. इसके बाद JRDA मामूली कीमत पर मकान लीज पर देगी. दिसंबर 2026 तक लोदना और बस्ताकोला क्षेत्र से 3691 परिवारों के शिफ्ट कराने का लक्ष्य है. शिफ्ट कराने के लिए निर्धारित परिवारों के लक्ष्य में से सिर्फ 51 के पास ही वैध दस्तावेज है.

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