झारखंड की लोक संस्कृति का प्रमुख पर्व करमा मंगलवार को तोपचांची प्रखंड क्षेत्र में हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। गोमो और तोपचांची क्षेत्र के विभिन्न गांवों, टोलों और मोहल्लों में करमा पर्व को लेकर दिनभर चहल-पहल रही। जगह-जगह अखरा का आयोजन कर उसे विद्युत रोशनी से सजाया गया था। अखरा में करम डाली स्थापित की गई। युवतियों और महिलाओं ने नए वस्त्र धारण कर जावा डाली को विभिन्न फूलों से सजाया। करम डाली के चारों ओर समूह में बैठकर युवतियों ने नाय (पुरोहित) के नेतृत्व में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान 'अपन करम भैया के धरम' बीज मंत्र और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ करम डाली की पूजा की गई। बहनों ने अपने भाइयों की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना की। पूजा के बाद ढोल-मांदर की थाप पर करम गीत गाए गए। गीतों पर युवतियां और महिलाएं देर रात तक नाचती गाती रहीं। गोमो क्षेत्र के खेसमी, गुनघुसा, जीतपुर, चैता, खेरा बेड़ा, विशुनपुर, हरिहरपुर, खरियो और पावापुर समेत विभिन्न गांवों में आयोजित अखरों में लोगों की भीड़ जुटी रही।
इसी तरह तोपचांची मानटांड़, चितरपुर, क्षेत्र के दुमदुमी,रामाकुंडा, गेंदनवाडीह, तातरी, ढांगी और नैरो समेत अन्य गांवों में भी करमा पर्व धूमधाम से मनाया गया। गांवों में पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य का दौर देर रात तक चलता रहा।
प्रखंड प्रमुख आनंद कुमार भी विभिन्न अखरा आयोजनों में शामिल हुए और सभी करमेटी बहनों को करमा पर्व की शुभकामनाएं दीं। मौके पर स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। करम गीतों पर लोग झूमते नजर आए।

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