
हिंदू धर्म में संतान की कुशलता और वंश की निरंतरता के लिए अनेक व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं. इन्हीं में से एक है जीउतिया व्रत जिसे जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है.
यह महिलाओं का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें माताएं अपने संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की मंगल कामना करती हैं. वर्ष 2025 में यह व्रत 14 सितंबर, रविवार को मनाया जाएगा. इस बार यह व्रत आश्विन कृष्ण अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र और जयद् योग जैसे विशेष संयोग में पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है. ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार, इसका पारण 15 सितंबर, सोमवार की सुबह अष्टमी तिथि समाप्ति के बाद किया जाएगा.सरगही और ओठगन की परंपरा जीउतिया व्रत से एक दिन पहले, यानी 13 सितंबर की भोर में महिलाएं सरगही और ओठगन करती हैं. इस समय व्रती महिलाएं चाय, शरबत, मिष्ठान्न, ठेकुआ, गुझिया, दही-चूड़ा आदि का सेवन करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं. परंपरा है कि नहाय-खाय के दिन महिलाएं मड़आ की रोटी और नोनी का साग खाती हैं. मान्यता है कि जैसे नोनी का पौधा हर परिस्थिति में पनपता है, वैसे ही संतान की रक्षा और वंश वृद्धि सुनिश्चित होती है.

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