धनबाद : झारखंड और पश्चिम बंगाल में कोयले का अवैध खनन एक गंभीर कानून-व्यवस्था का मुद्दा बन चुका है। इस समस्या से निपटने के लिए नक्सली गतिविधियों को नियंत्रित करने जैसी सख्त रणनीति अपनाने की जरूरत है।
यह बात कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में नवंबर में हुई बैठक के जनवरी में जारी मिनट्स में सामने आई है। इसके बाद कोयला कंपनियों को भी इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
कोयला मंत्रालय के कड़े रुख के बाद बीसीसीएल में भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पूरे मामले की रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जा रही है। कंपनी सूत्रों के अनुसार, ऐसे लोगों की सूची भी तैयार की जा रही है, जिनकी अवैध खनन, कोयला प्रेषण सहित अन्य मामलों में भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
बीसीसीएल प्रबंधन की विशेष नजर बाघमारा, कतरास, झरिया और चांच विक्टोरिया क्षेत्रों पर है। बताया जाता है कि सीमा क्षेत्र का लाभ उठाकर यहां अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है। बीसीसीएल के बंगाल में स्थित एक परियोजना में चार दिन पहले अवैध खनन के दौरान तीन लोगों की मौत का मामला भी उच्च स्तर तक पहुंच चुका है।
नेता प्रतिपक्ष ने उठाया कोयला चोरी का मुद्दा
धनबाद सहित राज्य के कई जिलों में कोयले के अवैध कारोबार को लेकर झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड पुलिस कोयला चोरी और तस्करी के मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं कर रही है, जिस पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह मामला केंद्रीय जांच एजेंसियों तक पहुंचा, तो कार्रवाई की जद में आने वाले माफिया, पुलिस अधिकारी और सत्ताधारी दल के नेता इसे राजनीतिक साजिश बताकर बचने की कोशिश करेंगे, लेकिन उसका कोई लाभ नहीं होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह बात कही। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या ईडी के बाद अब कोई अन्य केंद्रीय एजेंसी भी झारखंड में कोयला चोरी और तस्करी की जांच कर सकती है।

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