पाँच विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने कंपनी के नीति के खिलाफ एक सुर में भारी हुंकार।
विधायकों ने कहा जल-जंगल-ज़मीन, आदिवासी-मूलवासी अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई
कतरास: मधुबन बचाव संघर्ष मोर्चा के मंच पर आज पाँच विधानसभा क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि एकजुट होकर पहुंचे और कंपनी के खिलाफ एक सुर में आवाज़ बुलंद की। मंच से साफ ऐलान किया गया कि मधुबन की ज़मीन किसी भी कीमत पर कंपनी को रियायत देकर नहीं दी जाएगी।
कार्यक्रम में
मथुराप्रसाद महतो — विधायक, टुंडी
चन्द्रदेव महतो — विधायक, सिंदरी
अरुप चटर्जी — विधायक, निरसा
उमाकांत रजक — विधायक, चन्दनकियारी
जलेश्वर महतो — पूर्व मंत्री
ने एकजुट होकर मधुबन की जनता के साथ खड़े होने का संकल्प लिया।
नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल ज़मीन का नहीं, बल्कि जल-जंगल-ज़मीन, आदिवासी-मूलवासी अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। कंपनियां विकास के नाम पर मधुबन और आसपास के गांवों को उजाड़ने की साजिश कर रही हैं, जिसे किसी भी हाल में सफल नहीं होने दिया जाएगा।
सभा में मौजूद हजारों ग्रामीणों ने “जल-जंगल-ज़मीन हमारा है” और “कंपनी वापस जाओ” जैसे नारों के साथ आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया।
मधुबन बचाव संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि जब तक ग्रामीणों के अधिकार सुरक्षित नहीं होते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
यह है मामला मधुबन मे लगभग 71डिसमिल गैर आबाद जमीन है और लगभग 300 एकड़ रैयतों की जमीन है। जिसे बीसीसीएल प्रबंधन एक सोची समझी साजिश के तहत अधिग्रहण कर मधुबन बस्ती स्थित आसपास के गांव घर को उजाड़ने की चाल चल रही है। रैयतों का कहना है की देश हित मे हमलोग बीसीसीएल को जमीन देने के लिए भी तैयार है लेकिन बदले में नियोजन व उचित मुआवजे के साथ इतनी ही जमीन बीसीसीएल उपलब्ध कराए, हम सभी लोग को एक ही जगह पर बसाने का काम करे। बेनीडीह, और नदखुरकी पंचायत का हवाला देते हुए कहा की कोयला उत्पादन कार्य करने के लिए बीसीसीएल प्रबंधन ने जमीन अधिग्रहण कर इन गांवों को उजाड़ दिया। आज हालत यह है की ये दोनो गांव झारखंड राज्य के नक्शे से गायब हो गया है। जिस के कारण गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। बीसीसीएल प्रबंधन वही हाल मधुबन पंचायत का भी करने पर तुली हुई है। पहले-पहल बीसीसीएल प्रबंधन ने आउटसोर्सिंग उद्योग को लाया अब एमडीओ के तहत गांव को उजाड़ने का काम कर रही है। अभी इंदु कुरी आउटसोर्सिंग प्रबंधन किसी एक व्यक्ती के नाम पर जमीन अधिग्रहण करना चाहती है जो गलत है और जमीन की कीमत भी कौड़ी के भाव लगा रही है इसलिए हमलोग या तो बीसीसीएल प्रबंधन को अपनी जमीन उचित मूल्य पर देंगे या फिर नही देंगे।

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