मध्य प्रदेश के नीमच ज़िले के रानपुर गाँव में जिससे बात कीजिए वह यही कहते हुए कंचन बाई की बहादुरी और साहस की कहानी सुना रहा है.
दरअसल, ज़िला मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर बसे रानपुर का आंगनबाड़ी परिसर मधुमक्खियों के हमले की चपेट में आ गया.जहाँ आमतौर पर बच्चों की हँसी और शरारतें सुनाई देती हैं, वहाँ अचानक चीख पुकार की आवाज़ आने लगी।बीबीसी के अनुसार ग्रामीण बताते हैं कि क़रीब साढ़े तीन बजे का समय था, जब आंगनबाड़ी के आसपास मौजूद बच्चों पर मधुमक्खियों का झुंड टूट पड़ा. उस वक़्त परिसर में क़रीब 20 से 25 बच्चे थे.कंचन बाई ने जिन बच्चों को बचाने की कोशिश की उनमें उनका पोता भी शामिल उसी समय वहाँ मौजूद 55 साल की आंगनबाड़ी सहायिका कंचन बाई ने हालात को भांपा और बच्चों को बचाने दौड़ पड़ीं.प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कंचन बाई ने बिना समय गंवाए बच्चों को भीतर की ओर ले जाना शुरू किया. उन्होंने पहले आंगनबाड़ी में रखी दरियां और कंबल निकालकर बच्चों को ढका और फिर अपनी साड़ी से बच्चों को बचाने का प्रयास किया.उनके इस साहसी क़दम ने लगभग 25 बच्चों की जान बचा ली, जिसमें उनका अपना पोता भी शामिल था लेकिन वह ख़ुद मधुमक्खियों के हमले में बुरी तरह घायल हो गई थीं.अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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