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बेटियां ही हैं असली 'लक्ष्मी' 5 साल के इंतजार के बाद घर आई 'लाडो', दास टोला ने ढोल-नगाड़ों से किया बिटिया का शाही स्वागत।


अबीर-गुलाल और गाजे-बाजे के साथ नवजात का अभिनंदन 

तोपचांची में बदली सोच की सुखद तस्वीर, ग्रामीणों ने पेश की मिसाल

कहते हैं कि जब आंगन में बेटियों के नन्हे कदम पड़ते हैं, तो घर स्वर्ग बन जाता है। तोपचांची के दास टोला में शनिवार को कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जिसने यह साबित कर दिया कि समाज में बेटियों को लेकर सोच अब बदल रही है। पांच साल के लंबे इंतजार के बाद कुणाल कुमार दास और पूनम देवी के घर जब नन्ही परी ने जन्म लिया, तो पूरे गांव ने मिलकर इसे एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि समूचे समाज का उत्सव बना दिया।

फूलों से सजा रास्ता, अबीर से सतरंगी हुआ आसमान

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जैसे ही नवजात बच्ची अपनी मां के साथ गांव की सीमा में दाखिल हुई, ग्रामीणों ने उसका स्वागत किसी राजकुमारी की तरह किया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर ग्रामीण झूम उठे। गाजे-बाजे के साथ बच्ची को उसके घर तक लाया गया। रास्ते भर अबीर-गुलाल उड़ाए गए और घर को ताजे फूलों व बंदनवारों से की तरह सजाया गया। 

पूरे गांव ने उतारी 'लाडो' की नजर

गांव की बुजुर्ग महिलाओं और युवाओं ने मिलकर इस पल को ऐतिहासिक बना दिया। कुणाल दास और पूनम देवी की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा कि बिटिया के आने से उनका घर पूरा हो गया है, लेकिन ग्रामीणों ने जिस तरह का प्यार और सम्मान उनकी लाडो को दिया, उसने इस खुशी को हजार गुना बढ़ा दिया है। 

बेटे-बेटी के भेदभाव पर कड़ा प्रहार

इस मौके पर ग्रामीणों ने एक सुर में कहा कि बेटी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की लक्ष्मी होती है। आज भी कई लोग बेटे की चाहत रखते हैं, लेकिन हमारे गांव की यह खुशी उन लोगों के लिए संदेश है कि बेटियां अनमोल हैं। पांच साल के इंतजार के बाद हमारे टोले में खुशियां आई हैं, तो जश्न भी ऐतिहासिक होना चाहिए।

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