तोपचांची: 16वें वित्त आयोग एवं ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान (GPDP) को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम 3 अगस्त से 11 अगस्त तक आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में चार बैच के माध्यम से पंचायतों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण दिया गया।
निरसा प्रखंड के प्रखंड समन्वयक पंचायती राज एवं मास्टर ट्रेनर उदय शंकर तिवारी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान ग्राम पंचायत सहजकर्ता दल (GPFT) को तैयार किया गया। इसमें पंचायत सचिव, मुखिया/सरपंच, BPRP सदस्य, स्वयं सहायता समूह के सदस्य, पंचायत स्वयंसेवक, रोजगार सेवक सहित 14 लाइन विभागों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
प्रशिक्षण के बाद यह टीम गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को GPDP की योजनाओं के प्रति जागरूक करेगी। इसके लिए नुक्कड़ नाटक सहित अन्य जागरूकता माध्यमों का भी सहारा लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग की राशि से पंचायतों के Own Source Revenue (OSR), यानी स्वयं के आय स्रोत विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि पंचायतें अपनी आय प्राप्त कर सकें और उस राशि का उपयोग विकास कार्यों में किया जा सके।
साथ ही PDI की 9 थीम में से जिस थीम का स्कोर सबसे कम होगा, उसे प्राथमिकता देते हुए GPDP में विकास योजना तैयार की जाएगी। इससे पंचायत स्तर पर स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी।
वहीं, रोटी बैंक यूथ क्लब, धनबाद से मास्टर ट्रेनर गणेश शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान जल संरक्षण, भूमि संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और बाल विकास सहित विभिन्न विषयों पर जानकारी दी गई। प्रशिक्षण प्राप्त पंचायत प्रतिनिधि अपने-अपने गांवों में जाकर ग्रामीणों को GPDP की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन के बारे में जानकारी देंगे। उन्होंने बताया कि वे पिछले तीन दिनों से प्रशिक्षण दे रहे हैं।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की जरूरत के अनुसार योजनाओं का चयन कर पंचायतों का समग्र विकास करना और पंचायतों को अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।
इस योजना के माध्यम से आने वाले पांच वर्षों में गांवों के विकास को गति मिलेगी। साथ ही, विभिन्न विकास कार्यों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
इसके अलावा, VB-G RAM-G, जिसे नरेगा का परिवर्तित नाम बताया जा रहा है, के माध्यम से ग्रामीणों को 125 दिनों के रोजगार की सुनिश्चितता मिलने से ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आर्थिक रूप से सहायता प्राप्त होने की उम्मीद है।
प्रशिक्षण के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों एवं संबंधित कर्मियों को योजनाओं की बेहतर समझ देने का प्रयास किया गया, ताकि वे ग्रामीणों की आवश्यकताओं को समझकर प्रभावी ढंग से विकास योजनाएं तैयार कर सकें और उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सकें।

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