धनबाद : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन की खपत कम करने, अनावश्यक यात्रा से बचने और जहां संभव हो वहां संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील किए जाने के बाद धनबाद की राजनीति में भी इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री की बात का समर्थन करते हुए अपने काफिलों में वाहनों की संख्या घटाने की बात कही है, जबकि कांग्रेस ने इसे चुनाव बाद की औपचारिक सलाह बताते हुए भाजपा नेताओं के बड़े-बड़े काफिलों पर सवाल खड़े किए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद धनबाद में ईंधन बचत और वीआईपी काफिलों को लेकर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है. एक ओर भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री की बात को व्यवहारिक बताते हुए उसका समर्थन किया है, वहीं कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर महंगाई और आर्थिक दबाव का बोझ आम जनता पर डालने का आरोप लगाया है.
*हर नागरिक अपने वाहन का सोच समझ कर करे इस्तेमाल : राज सिन्हा*
धनबाद के भाजपा विधायक राज सिन्हा ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती लागत को देखते हुए हर नागरिक को अपने वाहन का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए. उन्होंने कहा कि वे स्वयं सप्ताह में एक दिन साइकिल या टोटो से यात्रा करेंगे, ताकि लोगों को ईंधन बचत के लिए प्रेरित किया जा सके. राज सिन्हा ने यह भी स्वीकार किया कि नेताओं को अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम करने की दिशा में पहल करनी चाहिए.
*रागिनी सिंह ने की कार्यकर्ताओं से वाहनों की संख्या सीमीत रखने की अपील*
झरिया की विधायक रागिनी सिंह ने कहा कि वे अपने कार्यकर्ताओं से अपील करेंगी कि कार्यक्रमों के दौरान वाहनों की संख्या सीमित रखी जाए. उन्होंने कहा कि अनावश्यक आयोजन कम होंगे तो जनप्रतिनिधियों पर हर कार्यक्रम में शामिल होने का दबाव भी घटेगा और ईंधन की बचत संभव होगी.
*पार्टी के नेता और कार्यकर्ता कम वाहनों का करें इस्तेमाल : बाबूलाल मरांडी*
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी कहा कि वे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को काफिलों में कम वाहनों के उपयोग के लिए निर्देश देंगे. उनका कहना था कि यदि सभी लोग इस दिशा में सहयोग करें तो राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की बड़ी बचत हो सकती है.
*काफिले के साथ चलना जरूरी : ढुल्लू महतो*
हालांकि धनबाद सांसद ढुल्लू महतो ने इस विषय पर सुरक्षा का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि उनकी स्थिति ऐसी है कि पर्याप्त सुरक्षा के बिना यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है. उनके अनुसार, यदि वे काफिले के साथ नहीं चलेंगे तो माफिया तत्व उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं.
*कांग्रेस ने बीजेपी नेताओं को घेरा*
इधर धनबाद जिला कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे पर केंद्र सरकार और भाजपा को घेरते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने दर्जनों गाड़ियों के काफिलों के साथ प्रचार किया, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही आम जनता को पेट्रोल-डीजल बचाने की नसीहत दी जा रही है.
*पहले नेता त्याग करें फिर लोगों से अपेक्षा रखें : कांग्रेस*
युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कुमार गौरव ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में ईंधन बचत को लेकर गंभीर है तो सबसे पहले भाजपा के सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के बड़े काफिलों पर रोक लगाई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के नेता स्वयं संसाधनों का व्यापक उपयोग करें और जनता से त्याग की अपेक्षा करें, यह दोहरा मापदंड है.
*आर्थिक दबाव केंद्र सरकार की नीतिगत विफलता : कांग्रेस*
धनबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष संतोष सिंह ने कहा कि बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की संभावित मूल्य वृद्धि और आर्थिक दबाव केंद्र सरकार की नीतिगत विफलता को दर्शाते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए और अब उसकी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है.धनबाद के भाजपा सांसद खुद वाहनों के काफिले में चलते हैं. कई बड़े नेता वाहनों के काफिले में चलते हैं.उनके ऊपर लगाम लगाने की जरूरत है.
*पहले ही जनता महंगाई, बेरोजगारी और घरेलू खर्च से परेशान*
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश की जनता पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ते घरेलू खर्च से जूझ रही है. ऐसे समय में लोगों से यात्रा कम करने और ईंधन बचाने की अपील यह संकेत देती है कि सरकार आर्थिक दबाव में है. कांग्रेस ने मांग की कि केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस नीति बनाए और आम जनता को राहत दे.
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री की ईंधन बचत संबंधी अपील ने धनबाद में राजनीतिक बहस को नया आयाम दे दिया है. भाजपा इसे जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे सरकार की आर्थिक चुनौतियों और दोहरे रवैये का प्रतीक करार दे रही है.

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