मधुबन बचाओ संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों-सदस्यों ने दिया सामूहिक इस्तीफा, नए संगठन के गठन का निर्णय
कतरास न्यूज़:-बीसीसीएल मधुबन कोलियरी में संचालित इंदुकुरी कंपनी के सर्वे इंजीनियर मोहम्मद शहनवाज अंसारी के साथ मारपीट के मामले में तीन रैयतों पर केस दर्ज होने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया है. ग्रामीणों ने कंपनी पर रैयतों को डराने-धमकाने और झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है. रविवार को मधुबन पंचायत सचिवालय में सात मौजा के रैयतों व ग्रामीणों ने प्रेस वार्ता कर मुकदमा वापस लेने की मांग की. साथ ही मधुबन बचाओ संघर्ष मोर्चा के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने तथा नए सिरे से संगठन गठित करने का निर्णय लिया. मधुबन, बांसजोड़ा, मोहनपुर, पाडुआबिठा, केशरगढ़, सिद्धपोकी और सदरियाडीह मौजा के ग्रामीणों ने कहा कि जिस जनकल्याणकारी उद्देश्य से मोर्चा बनाया गया था.वह अब अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है. रैयतों के अनुसार अब मुखिया, पंचायत प्रतिनिधियों, कॉलोनीवासियों, युवाओं, किसानों और रैयतों की सहमति से नया व्यापक संगठन बनाया जाएगा. जो जमीन, नियोजन, मुआवजा, पुनर्वास और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा.खरखरी ओपी में मधुबन बस्ती के राजेश महतो, भूदेव महतो और मुरली महतो के खिलाफ रास्ता रोकने, मारपीट, गाली-गलौज, नकदी छीनने, सर्वे मशीन क्षतिग्रस्त करने के प्रयास और रंगदारी समेत अन्य आरोपों में मामला दर्ज है. ग्रामीणों ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि रैयतों की जमीन पर बिना जानकारी और सहमति के सर्वे कार्य का विरोध करने पर मुकदमा किया गया है. उन्होंने मुकदमा तत्काल वापस लेने की मांग की. ग्रामीणों ने कहा कि कंपनी को पहले रैयतों और प्रभावित परिवारों से वार्ता करनी होगी. प्रस्तावित खनन से होने वाले विस्थापन, नियोजन, मुआवजा, पुनर्वास, ब्लास्टिंग, प्रदूषण और जलस्रोतों पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी देनी होगी. ग्रामीणों ने कहा कि गांव से करीब दो किलोमीटर दूर बेनीडीह और ब्लॉक टू में ब्लास्टिंग से ही घरों में कंपन महसूस होता था. ऐसे में आबादी के नजदीक ब्लास्टिंग से मकानों को नुकसान की आशंका है. ग्रामीणों के अनुसार खनन से उड़ने वाली धूल व छाई खेतों और तालाबों में जमा होगी. सैकड़ों फीट गहरी खुदाई से चापाकल और कुओं का जलस्तर प्रभावित होने की आशंका है. इससे पेयजल संकट और मवेशियों पर भी असर पड़ सकता है. ग्रामीणों ने कहा कि पहले इन मुद्दों पर वार्ता हो, उसके बाद ही कंपनी आगे का काम करे. मुकदमा वापस नहीं हुआ तो व्यापक और उग्र आंदोलन किया जाएगा. कंपनी की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी. प्रेस वार्ता में मुखिया कमलेश्वर महतो, शेख रहीम, गोपाल महतो, वंशी महतो, राजेश महतो, भूदेव महतो, राजू महतो, महेंद्र कुमार दास, योगेंद्र रवानी, प्रदीप चौहान, राजेश चौहान, कृष्णा कुमार महतो, विक्रम महतो, मनोज महतो, चेतलाल महतो, रवि लाल महतो, बंटी महतो, भगीरथ रविदास, दीनू महतो, भगलु महतो, मंटू महतो, विद्यानंद महथा, रतिलाल महतो, प्रेमचंद्र महतो, प्रकाश महतो, ओम प्रकाश महतो, दीपक रविदास, जगदीश रविदास, मधु महतो, दीपक दंसोधि, अनुज दंसोधि आदि मौजूद थे.

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