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सवाल :कतरास,छाताबाद,चैतुडीह और लकड़का को खोखला करने वाला इस पूरे खेल का गॉडफादर आखिर है कौन ?


धनबाद : कतरास कोयलांचल के चारों ओर से इन दिनों भूधंसान और जमींदोज होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही है। कोयले का अवैध उत्खनन कर इसमें संलिप्त लोग खाकपति से करोड़पति बन गये। कोयले के अवैध उत्खनन से किसी ने जमीन ले ली ,घर बना लिए, गाडियां खरीद ली, रिसार्ट बना लिए। इस काम में सभी ने आमजन की सुरक्षा और संरक्षा का किसी ने भी ख्याल नहीं रखा। कोयले के अवैध उत्खनन में बीसीसीएल प्रबंधन, सीआईएसएफ, पुलिस और प्रशासन ने भरपूर सहयोग व छूट दी। आज चहुंओर से जमींदोज और भू-धंसान की खबरें आर रही है। कितने लोग काल कवलित हो रहे हैं। कितनों के सपने खाक हो रहे। कितनों का आशियाना उजड़ रहा। 

अब यहां सवाल उठता है कि आखिर किसने इस इलाके में लंबे समय तक अवैध खनन से अपना कारोबार चलाया?

अब सवाल सिर्फ कोयले का नहीं, जमीन, जिंदगी और आने वाली पीढ़ियों का है।

कभी कारोबार का चेहरा, कभी जनप्रतिनिधि का चोला, तो कभी समाजसेवी की पहचान...

लेकिन जनता सब देख रही है। अब डरने की बारी जनता की नहीं, जवाब देने की बारी उनकी है, जो वर्षों से कोयलांचल की जमीन को खोखला कर रहे हैं।

अंगारपथरा,रामकनाली , केशलपुर , छाताबाद से उठी आवाज अब कतरास, चैतुडीह और लकड़का तक जाएगी।

कोयला किसने निकाला , किसने कमाया? और कीमत कौन चुका रहा है कौन ?

इन सवालों का जवाब चाहिए। खोजिए नहीं तो देर हो जायेगी। क्योंकि कोयले का यह काला खेल अभी बंद नहीं हुआ,यह अभी भी जारी है।

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