-->

सवाल : बाघमारा में डीएमएफटी फंड का सदुपयोग या दुरुपयोग, उठ रहे सवाल


अंगारपथरा सोनारडीह व भागाबांध में भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र में बनाए जा रहे हैं आंगनबाड़ी केंद्र

धनबाद : बाघमारा प्रखंड के तीन स्थानों पर डीएमएफटी फंड से डेंजर जोन में आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कर दिया गया है। अंगारपथरा सोनारडीह व भागाबांध में भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र में बनाए जा रहे हैं आंगनबाड़ी केंद्र।

जिम्मेदार कौन?

अब यहां सवाल यह उठता है कि इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है। विभाग ,एजेंसी,सीडीपीओ या बीसीसीएल के अधिकारी।बाघमारा में डीएम-एसपी फंड (जिसे मुख्य रूप से DMFT - District Mineral Foundation Trust फंड के रूप में जाना जाता है) के सदुपयोग और दुरुपयोग को लेकर स्थानीय स्तर पर और प्रशासनिक हलकों में लगातार बहस चलती रही है। यह फंड मूल रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के विकास, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए बनाया गया है।बाघमारा में इस फंड के उपयोग को दोनों पहलुओं से समझा जा सकता है:1. फंड का सदुपयोग (विकासात्मक कार्य)सरकारी आंकड़ों और हालिया प्रशासनिक निर्णयों के अनुसार, बाघमारा ब्लॉक में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए फंड का निवेश किया गया है।

सड़क और बुनियादी ढांचा :

 सितंबर 2026 में धनबाद जिले में DMFT फंड से ₹17.55 करोड़ की लागत से 11 महत्वपूर्ण सड़क योजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें बाघमारा, झरिया और तोपचांची जैसे क्षेत्रों को मुख्य रूप से शामिल किया गया है।योजनाओं का क्रियान्वयन: आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, बाघमारा ब्लॉक में लगभग 142 योजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें से ₹48.6 करोड़ के स्वीकृत बजट के मुकाबले ₹39.2 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं (यानी लगभग 80.6% फंड का उपयोग हुआ है)। 

प्राथमिकता वाले क्षेत्र : यह राशि पेयजल योजनाओं, स्वच्छता, महिला एवं बाल कल्याण, और तालाबों के जीर्णोद्धार जैसे कार्यों पर खर्च की जा रही है।2. फंड का दुरुपयोग और विसंगतियां (चुनौतियां और शिकायतें)दूसरी ओर, स्थानीय निवासियों, राजनीतिक दलों और ऑडिट रिपोर्टों में इस फंड के दुरुपयोग और प्राथमिकताओं से भटकाव के आरोप भी लगते रहे हैं।

गहन ऑडिट और जांच : झारखंड सरकार ने DMFT फंड में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और दुरुपयोग की शिकायतों के बाद धनबाद सहित प्रमुख खनन जिलों में गहन ऑडिट (Deep Audit) के आदेश दिए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में भी पूर्व में अरबों रुपये के फंड में गड़बड़ी की बात सामने आई थी।मूल प्राथमिकताओं से भटकाव: नियमों के मुताबिक, इस फंड का बड़ा हिस्सा खनन से सीधे प्रभावित गरीब ग्रामीणों के स्वास्थ्य, विस्थापन और शुद्ध पेयजल पर खर्च होना चाहिए। लेकिन अक्सर आरोप लगते हैं कि इस पैसे को उन सामान्य विकास कार्यों या शहर के सौंदर्यीकरण में लगा दिया जाता है, जिनका लाभ सीधे प्रभावित ग्रामीणों को नहीं मिलता। कई क्षेत्रों में आज भी ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

निगरानी का अभाव : बाघमारा जैसे संवेदनशील कोयला क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति और स्थानीय ठेकेदारों-माफियाओं के हस्तक्षेप के कारण कई बार योजनाएं कागजों पर या आधी-अधूरी बनकर रह जाती हैं, जिससे फंड की बर्बादी होती है।

निष्कर्ष :

बाघमारा में कागजी तौर पर और धरातल पर कई महत्वपूर्ण सड़कों व जलापूर्ति योजनाओं के निर्माण में इस फंड का सदुपयोग दिख रहा है। हालांकि, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक ढिलाई और प्रभावित लोगों तक सीधे लाभ न पहुंचने के कारण बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और विसंगतियों के आरोप भी पूरी तरह सही हैं, यही वजह है कि वर्तमान में यह फंड उच्च-स्तरीय जांच के दायरे में है।

Post a Comment

0 Comments