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हीट स्ट्रोक को समझें और उससे बचाव करे


हीट स्ट्रोक एक गंभीर और जानलेवा आपातकालीन स्थिति है, जो तब होती है जब शरीर अत्यधिक गर्म हो जाता है और उसका आंतरिक तापमान तेजी से बढ़कर 40°C / 104°F या उससे अधिक पहुंच जाता है। तेज गर्मी, अधिक नमी, लगातार भारी शारीरिक श्रम या सुरक्षा उपकरण पहनकर काम करने के दौरान इसका खतरा काफी बढ़ जाता है। यदि समय पर उपचार न मिले, तो हीट स्ट्रोक शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा पहुंचा सकता है और यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। हीट स्ट्रोक के लक्षणों की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि हीट एग्जॉशन से हौट स्ट्रोक की स्थिति कुछ ही समय में गंभीर रूप ले सकती है। इसके प्रमुख संकेतों में शरीर का आंतरिक तापमान 40त्ठ या उससे अधिक होना शामिल है। इसके साथ व्यक्ति के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई दे सकते हैं, जैसे भ्रम की स्थिति, बेचैनी, अस्पष्ट या लड़खड़ाती आवाज, दौरे पड़ना अथवा बे-होशी। अन्य महत्वपूर्ण लक्षणों में त्वचा का लाल, अत्यधिक गर्म और सूखी हो जाना, मांसपेशियों में ऐंठन या दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी शामिल हैं। इसके अलावा मतली, उल्टी, तेज सांस चलना, हृदय गति बढ़ना और तेज सिरदर्द भी हीट स्ट्रोक के गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसे कि सी भी लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।

हीट स्ट्रोक से बचाव कुछ आसान लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सावधानियों को अपनाकर किया जा सकता है। सबसे जरूरी है शरीर को हमेशा हाइड्रेट रखना। इसके लिए नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय पदार्थों का सेवन करें। वहीं, कैफीन और अल्कोहल जैसे शरीर में पानी की कमी बढ़ाने वाले पेय पदार्थों से दूरी बनाए रखें। गर्मी के मौसम में हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनना चाहिए, ताकि पसीना आसानी से सूख सके और शरीर प्राकृतिक रूप से ठंडा बना रहे। तेज धूप से बचना भी अत्यंत आवशयक है। खासकर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और जहां तक संभव हो, छायादार या ठंडी जगहों पर रहें। यदि बाहर काम करना जरूरी हो, तो नियमित अंतराल पर आराम करें और छायादार या ठंडी जगह पर कुछ समय अवशय बिताएं। घर और कार्यस्थल को ठंडा रखने के लिए पंखे, कूलर या एयर कंडीशनर का उपयोग करें। ठंडे पानी से स्नान या शॉवर लेना भी शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मददगार होता है। जो लोग गर्म मौसम के अभ्यस्त नहीं हैं, उन्हें अचानक लंबे समय तक धूप या गर्म वातावरण में रहने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि वे 7 से 14 दिनों के दौरान धीरे-धीरे बाहर बिताए जाने वाले समय को बढ़ाएं, ताकि शरीर गर्मी के अनुसार खुद को ढाल सके। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति से प्रभावी रूप से बचा जा सकता है।

यदि आपको आशंका हो कि कोई व्यक्ति हीट स्ट्रोक का शिकार हो रहा है, तो तुरंत कार्रवाई करना बेहद जरूरी है, क्योंकि थोड़ी सी देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है। सबसे पहले बिना समय गंवाए आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए संपर्क करें। मदद पहुंचने तक प्रभावित व्यक्ति को तुरंत किसी ठंडी, छायादार या वातानुकूलित स्थान पर ले जाएं। इस दौरान शरीर का तापमान तेजी से कम करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए पानी का छिड़काव करें, गीले तौलिए से शरीर को ठंडा करें या गर्दन, बगल और जांघों के आसपास आइस पैक रखें, ताकि शरीर को जल्द राहत मिल सके। यदि व्यक्ति बेहोश हो, भ्रमित हो या सामान्य रूप से प्रतिक्रिया न दे पा रहा हो, तो उसे पानी या कोई भी तरल पदार्थ न दें, क्योंकि इससे घुटने का खतरा बढ़ सकता है।

गर्मी के इस मौसम में अपनी सुरक्षा के साथ-साथ आसपास के लोगों का भी ध्यान रखें।

डॉ. अंकित प्रकाश

सीनियर रजिस्ट्रार (ओएचएस) टाटा मेन हॉस्पिटल, जामाडोबा ।

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