धनबाद : कोयला चोरी की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कोयला मंत्रालय ने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय को प्राप्त शिकायतों के बाद मामले में कार्रवाई शुरू कर दी गई है और संबंधित क्षेत्रों में हो रही कथित कोयला चोरी की जानकारी मांगी गई है।
कोयला चोरी और अवैध कारोबार की शिकायतें
बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने इस मामले को काफी गंभीरता से लेते हुए पहले ही सार्वजनिक रूप से इस मामले को उठा रहे है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय को हाल के दिनों में कोयला चोरी और अवैध कारोबार से जुड़ी शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायतों में बीसीसीएल के कुछ कोलियरियों और आउटसोर्सिंग परियोजनाओं के आसपास बड़े पैमाने पर कोयले की अवैध निकासी का आरोप लगाया गया है। इसके बाद मंत्रालय ने बीसीसीएल प्रबंधन को पूरे मामले की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
मंत्रालय ने रिपोर्ट में कोयला चोरी की घटनाओं, रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों, सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संबंधी जानकारी भी मांगी है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना का ब्योरा देने को कहा गया है।
अवैध खनन से सड़क-रेल लाइन पर भी मंडरा रहा खतरा
कोयलांचल में कोयला चोरी और अवैध खनन का मामला अब केवल स्थानीय समस्या नहीं रह गया है। यह मुद्दा कोयला मंत्रालय से लेकर संसद और राज्य की राजनीति तक पहुंच चुका है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई जनप्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से इस समस्या पर चिंता जता चुके हैं।
विभिन्न आकलनों के अनुसार धनबाद क्षेत्र में हर वर्ष करीब 4,500 करोड़ रुपये मूल्य के कोयले की अवैध निकासी हो रही है, जिससे केंद्र सरकार, बीसीसीएल और देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह आकलन सरकार व कंपनी के लिए चिंता का विषय बन गया है।
हर दिन 25 से 30 हजार टन कोयले की अवैध ढुलाई
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि आउटसोर्सिंग परियोजनाओं और अवैध खनन स्थलों से प्रतिदिन बड़े पैमाने पर कोयले की निकासी हो रही है। उनके अनुसार लगभग 50 आउटसोर्सिंग परियोजनाओं और 50 से अधिक अवैध खनन स्थलों से रोज 400 से अधिक वाहन निकलते हैं। इसके माध्यम से प्रतिदिन 25 से 30 हजार टन कोयले की अवैध ढुलाई और बिक्री की जा रही है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय संपत्ति की खुली लूट करार दिया है।
इधर, बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल भी कई अवसरों पर स्वीकार कर चुके हैं कि कंपनी के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध खनन और कोयला चोरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उनका कहना है कि कोयला चोरी केवल कंपनी का नुकसान नहीं है, बल्कि इससे देश के राजस्व को भी क्षति पहुंचती है।
कोयला चोरी रोकने के लिए हर वर्ष करीब 500 करोड़ रुपये खर्च
कोयला चोरी रोकने के लिए बीसीसीएल हर वर्ष करीब 500 करोड़ रुपये सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च करती है। इस राशि में सीआईएसएफ के लगभग 3,000 जवानों का वेतन, सुरक्षा उपकरण और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। इसके बावजूद विशाल खनन क्षेत्र और संगठित गिरोहों की सक्रियता के कारण चुनौती बनी हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीआईएसएफ को कई अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी संभालनी पड़ती है, जिससे संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
बीसीसीएल ने हाल के वर्षों में ड्रोन निगरानी, डिजिटल सर्विलांस, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और अन्य तकनीकी उपायों को बढ़ावा दिया है। कंपनी के स्तर पर प्रतिदिन अवैध खनन और कोयला चोरी से जुड़े मामलों का रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है। इसके बावजूद अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है।

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