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गुनघुसा पंचायत के किसान अरशद अली ने पेश की आधुनिक खेती की मिसाल।


3.5 एकड़ में तैयार किया बहुउद्देशीय कृषि मॉडल

तोपचांची: गुनघुसा पंचायत के प्रगतिशील किसान अरशद अली ने आधुनिक कृषि और पशुपालन को अपनाकर क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। करीब 7-8 वर्षों से खेती कर रहे अरशद भाई ने पिछले चार वर्षों में मत्स्य विभाग के सहयोग से बायोफ्लॉक तकनीक के माध्यम से मछली पालन की शुरुआत की, जो आज सफल व्यवसाय का रूप ले चुका है।

अरशद भाई ने बताया कि उनके बायोफ्लॉक पॉन्ड में वर्तमान में लगभग 50 क्विंटल पंगेसियस मछली तैयार है, जो अगले एक महीने में बाजार के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगी। उन्होंने बताया कि उनकी मछलियों की आपूर्ति रांची और सासाराम सहित उन बाजारों में की जाती है, जहां बेहतर कीमत मिलती है।

मछली पालन के अलावा उनके फार्म में ऑर्नामेंटल (रंगीन) मछलियों का सेटअप, नर्सरी तालाब और पौधशाला भी संचालित है। वहीं मनरेगा योजना के तहत विकसित आम के बाग में करीब 170 आम के पेड़ लगाए गए हैं। यहां तैयार किए जाने वाले पौधे विभिन्न प्रखंडों में भी भेजे जाते हैं।

अरशद भाई केवल खेती और मत्स्य पालन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि मुर्गी पालन और बत्तख पालन भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत मुर्गी शेड का निर्माण कराया गया है तथा पशुपालन विभाग के सहयोग से मुर्गी पालन किया जा रहा है। गर्मी के कारण कुछ समय के लिए कार्य रुका था, लेकिन जल्द ही देसी मुर्गी के चूजे भी डाले जाएंगे।

उन्होंने बताया कि यह पूरा बहुउद्देशीय कृषि मॉडल करीब साढ़े तीन (3.5) एकड़ भूमि में विकसित किया गया है, जिसमें कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और पशुपालन को एक साथ जोड़कर आय के कई स्रोत तैयार किए गए हैं।

स्थानीय किसानों का कहना है कि गुनघुसा पंचायत के अरशद भाई का यह मॉडल आधुनिक और एकीकृत खेती का बेहतरीन उदाहरण है, जिससे क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरणा लेकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

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