नयी दिल्ली : पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस को लेकर चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल दिख रहा है. लोग डर के मारे सिलेंडर बुक कर रहे हैं, जिससे बुकिंग का आंकड़ा रिकॉर्ड तोड़ रहा है. लेकिन इस बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है.
सरकार और शिपिंग मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि समंदर के रास्ते गैस का बड़ा स्टॉक भारत पहुंचने वाला है. 16 और 17 मार्च की तारीखें बहुत अहम हैं, क्योंकि इन्हीं दो दिनों में कांडला और मुंद्रा पोर्ट पर एलपीजी से लदे दो बड़े जहाज लंगर डालेंगे.
बाजार में गैस की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है तो धैर्य रखने की. सरकार हर उस कदम पर नजर रखे हुए है जिससे आम आदमी की रसोई तक गैस पहुंचने में कोई रुकावट न आए. रिफाइनरी से लेकर प्रोडक्शन यूनिट तक सब कुछ फुल स्पीड में काम कर रहा है. आइए जानते हैं कि सरकार इस पैनिक यानी डर के माहौल को खत्म करने के लिए क्या-क्या बड़े कदम उठा रही है.
पैनिक बुकिंग ने बढ़ाई टेंशन
आंकड़े बताते हैं कि लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक कर रहे हैं. कल तक जहां बुकिंग का आंकड़ा 75 लाख पर था, वह आज बढ़कर 88 लाख तक पहुंच गया है. इसमें से 84 लाख बुकिंग तो अकेले ऑनलाइन की गई है. सरकार के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि जब लोग जरूरत न होने पर भी सिलेंडर बुक करते हैं, तो सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है.
हालात को सुधारने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है. घरेलू गैस का प्रोडक्शन भी करीब 31 फीसदी तक बढ़ गया है, जो एक बहुत बड़ा उछाल है. क्रूड ऑयल की सप्लाई भी पर्याप्त मात्रा में है और रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रोडक्शन कर रही हैं. यानी गैस की कमी बिल्कुल नहीं है, बस जरूरत से ज्यादा बुकिंग ने थोड़ी मुश्किल पैदा कर दी है.
बुकिंग के नए नियम जानना है जरूरी
अगर आप भी अपना सिलेंडर बुक करने की सोच रहे हैं, तो कुछ नियमों को याद रखना बहुत जरूरी है. कई जगहों से शिकायतें आ रही थीं कि बुकिंग नहीं हो रही है, लेकिन इसके पीछे एक तकनीकी नियम है. सरकार ने साफ किया है कि शहरी इलाकों में सिलेंडर की डिलीवरी मिलने के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग हो सकेगी. वहीं ग्रामीण इलाकों में यह समय सीमा 45 दिन की तय की गई है.
यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि गैस की कालाबाजारी रोकी जा सके और उन लोगों को प्राथमिकता मिले जिन्हें वाकई सिलेंडर की जरूरत है. अगर आप इस तय समय से पहले बुकिंग की कोशिश करेंगे, तो आपकी रिक्वेस्ट प्रोसेस नहीं होगी. इसलिए घबराएं नहीं और अपनी बारी का इंतजार करें.
ब्लैक मार्केटिंग पर सरकार का डंडा
गैस की किल्लत का फायदा उठाकर कुछ लोग ब्लैक मार्केटिंग की कोशिश कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन पर शिकंजा कस दिया है. कई राज्यों में पुलिस और फूड विभाग ने मिलकर छापेमारी की है. कुछ लोगों को अवैध तरीके से सिलेंडर बेचते हुए गिरफ्तार भी किया गया है. सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी हाल में गैस की कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
राज्य सरकारें भी इस मामले में एक्टिव हैं और कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर दी जा रही है. इसका मकसद यह है कि होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों को गैस की कमी न हो, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ न पड़े.
PNG पर शिफ्ट होने का सुनहरा मौका
गैस की समस्या का एक स्थाई समाधान पीएनजी यानी पाइप वाली गैस है. गेल (GAIL) ने हाल ही में ऑपरेटर्स के साथ एक बड़ी बैठक की है. इस मीटिंग में साफ निर्देश दिए गए हैं कि जो लोग भी पीएनजी कनेक्शन लेना चाहते हैं, उन्हें बिना किसी देरी के जल्दी से कनेक्शन दिया जाए. अब कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ता भी पीएनजी पर शिफ्ट हो सकेंगे.
पीएनजी न केवल सुरक्षित है बल्कि यह सिलेंडर की झंझट को भी खत्म कर देती है. गेल की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को पाइप वाली गैस से जोड़ा जाए ताकि एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम हो सके. अगर आपके इलाके में पाइपलाइन की सुविधा है, तो आपको तुरंत आवेदन करना चाहिए.
कांडला और मुंद्रा पोर्ट पर नजर
शिपिंग मंत्रालय ने जो अपडेट दिया है, वह सबसे ज्यादा राहत देने वाला है. 16 और 17 मार्च को कांडला और मुंद्रा पर एलपीजी लेकर आ रहे दो शिप पहुंच रहे हैं. जैसे ही ये जहाज पोर्ट पर पहुंचेंगे, गैस की सप्लाई में और तेजी आ जाएगी. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वे बेहतर हालात करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं.
कुल मिलाकर, सरकार का संदेश साफ है कि सप्लाई भरपूर है, जहाजों के जरिए और गैस आ रही है और प्रोडक्शन भी 31 फीसदी तक बढ़ गया है. बस लोगों को पैनिक बुकिंग से बचना चाहिए और नियमों का पालन करना चाहिए. अगर हम सब मिलकर समझदारी दिखाएंगे, तो गैस की यह किल्लत चुटकियों में खत्म हो जाएगी.

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