कतरास:विद्या भारती की योजनानुसार सरस्वती विद्या मंदिर सिनीडीह के प्रांगण में दादा-दादी, नाना-नानी सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सर्वप्रथम कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य उत्तम गयाली,प्रधानाचार्य रामाकांत राणा, प्रभारी अशोक कुमार सिंह के द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए आचार्य धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालयों में प्रत्येक वर्ष दादा-दादी ,नाना-नानी सम्मान समारोह का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य होता है समाज में दादा-दादी,नाना- नानी को उनके परिवार से जोड़े रखना और उन्हें मोबाइल के इस दौर में जिम्मेवार नागरिक तैयार करने में अपना सहयोग प्रदान करना। अतिथि परिचय आचार्य पंकज कुमार गुप्ता ने कराया। इस अवसर पर बहन प्राची एवं वंशिका ने दादा- दादी, नाना- नानी पर हिंदी में एवं बहन मुस्कान ने अंग्रेजी में कविता प्रस्तुत किया। मौके पर नन्हे-मुन्ने भैया-बहनों द्वारा प्रस्तुत नृत्य को सभी ने सराहा जबकि आचार्य राणाप्रताप सिंह द्वारा निर्देशित लघु नाटिका ने सबको भावुक बना दिया । अपने वक्तव्य के क्रम में उत्तम गयाली ने कहा कि दादा-दादी ,नाना-नानी किसी भी परिवार के लिए उसके केंद्र बिंदु होते हैं। नई पीढ़ी को मजबूत बनाने में इनका अहम योगदान होता है। इस कार्यक्रम के तहत उपस्थित 127 दादा-दादी, नाना-नानी का पांव प्रछालन कर उनका भव्य स्वागत किया गया, आचार्य अजय पांडे के द्वारा मंत्र उच्चारण के साथ उनका पूजन किया गया तत्पश्चात उनकी आरती उतारी गई। प्रधानाचार्य रामाकान्त राणा ने कहा कि आज हमारा समाज एकल परिवार में सिमटता जा रहा है जिसके कारण समाज में कई विकृतियां उत्पन्न हो रही है ।आज इस बात की आवश्यकता है कि हम सभी दादा-दादी ,नाना- नानी को यथोचित सम्मान दें एवं परिवार में उनकी आवश्यकता को समझें। मंच संचालन द्वादश की बहन चाहत खान एवं बरखा रानी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन आचार्य प्रियंका बागची के द्वारा दिया गया। उपस्थित बुजुर्गों ने इस कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी आचार्य-दीदी जी का विशेष योगदान रहा।

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